आधे नारी रूप वाले ईश्वर
शिव और पार्वती एक ही शरीर में, बीच से विभाजित। चेतना और शक्ति, जो कभी सचमुच अलग नहीं।
अन्य नाम: Ardhanārīnara · Ardhanārīśa · Ammaiyappar (Tamil)
उन्हें कैसे पहचानें
चित्र में देखने के लिए किसी पंक्ति पर जाएँ (या टैप करें)।
यह रूप क्या सिखाता है
अर्धनारीश्वर शिव का वह रूप है जिसमें एक ही विग्रह आधा पुरुष और आधा नारी है: दाहिना भाग शिव का — जटा, भस्म और त्रिशूल; बायाँ भाग पार्वती का — आभूषण, कोमल देह और दर्पण या कमल। यह दो व्यक्ति पास-पास खड़े नहीं हैं। यह एक ही सत्ता है, और बीच की रेखा जितना बाँटती है, उतना ही जोड़ती भी है।
शिव पुराण बताता है कि यह रूप कैसे प्रकट हुआ। ब्रह्मा ने मन से अनेक प्राणी रचे, पर सृष्टि अपने-आप नहीं बढ़ रही थी, क्योंकि तब तक शिव से नारी-तत्त्व प्रकट नहीं हुआ था। ब्रह्मा ने परम शक्ति से युक्त शिव का ध्यान करते हुए तप किया, और शिव अर्धनारीनर रूप में — आधे नारी, आधे नर — उनके पास आए। फिर उन्होंने उस देह के वाम भाग से देवी को अलग किया, और ब्रह्मा की प्रार्थना पर देवी ने वह शक्ति दी जिससे प्राणी माता-पिता से जन्म लेते हैं, और दक्ष की पुत्री बनकर जन्म लेना स्वीकार किया। पुराण यह कथा दो बार कहता है — एक बार नंदीश्वर के मुख से, एक बार वायुदेव के मुख से।
परंपरा इस रूप में शैव दर्शन की सबसे गहरी शिक्षा पढ़ती है: शिव और शक्ति दो नहीं हैं। शिव चेतना हैं — स्थिर और शुद्ध; शक्ति वह सामर्थ्य है जो चलती, रचती और आनंद लेती है। शक्ति के बिना चेतना कुछ कर नहीं सकती; चेतना के बिना शक्ति का कोई अस्तित्व नहीं। जिन जोड़ों से संसार बना है — स्थिरता और गति, ज्ञान और क्रिया, देने वाला और पाने वाला — वे सब इस एक विग्रह में साथ हैं।
यह रूप हर व्यक्ति से भी कुछ कहता है। हर मनुष्य में दोनों आधे भाग हैं — बल और कोमलता, अनुशासन और सौंदर्य, उग्रता और सौम्यता — और पूर्णता दोनों का आदर करने से आती है, किसी एक को नकारने से नहीं। कथा में भी, जब नारी-तत्त्व को उसका अपना स्थान मिलता है, तभी जीवन फलने-फूलने लगता है।
भक्त अर्धनारीश्वर को एक ही प्रतिमा में दिव्य दंपती के रूप में, और ऐसे सच्चे साथ के आदर्श के रूप में पूजते हैं जिसमें कोई भी कम नहीं। दांपत्य और परिवार में सामंजस्य के लिए इस रूप का स्मरण किया जाता है, और उन स्तुतियों में भी जहाँ शिव और पार्वती को साथ-साथ, जगत के माता-पिता के रूप में, सराहा जाता है।
इस रूप की कथाएँ
कहाँ दर्शन करें
- एलिफेंटा गुफाएँघारापुरी द्वीप, मुंबई के पास, महाराष्ट्र
मुख्य गुफा में, त्रिमुखी महेश के पास, अर्धनारीश्वर का विशाल शिल्प।
- अर्धनारीश्वर मंदिरतिरुचेंगोडु, तमिलनाडु
पहाड़ी पर स्थित मंदिर, जहाँ अर्धनारीश्वर ही प्रधान देवता हैं।
- बादामी गुफा मंदिरबादामी, कर्नाटक
शैव गुफा (गुफा 1) में अर्धनारीश्वर का प्रारंभिक चालुक्य शिल्प।
स्रोत
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इस संदर्भ का मूल अंश अभी यहाँ नहीं जोड़ा गया है। ऊपर दिया स्थान और संस्करण देखें; कथा हमारे शब्दों में पुनर्कथन है।
शिव का केंद्रीय पुराण, सात संहिताओं में: विद्येश्वर, रुद्र (पाँच खंडों में), शतरुद्र, कोटिरुद्र, उमा, कैलास और वायवीय। अध्याय-संख्या संस्करणों में बदलती है; हमारे सभी संदर्भ गीताप्रेस के कल्याण शिवमहापुराणाङ्क के अनुसार हैं।
ग्रंथ-संग्रह में देखें →निश्चित
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