जहाँ शिव का वर्णन है
ऋग्वेद से कर्नाटक के वचनों तक — तीन हज़ार वर्षों के ग्रंथ। इस साइट का हर श्लोक इन्हीं में से किसी तक पहुँचाता है।
Ṛgveda
सबसे प्राचीन वेद: ब्रह्मांड की शक्तियों के प्रति एक हज़ार से अधिक सूक्त।
Yajurveda — Śrī Rudram
यज्ञ-मंत्रों का वेद, दो शाखाओं में: कृष्ण और शुक्ल।
Śvetāśvatara Upaniṣad
छह अध्यायों का दार्शनिक उपनिषद्, भक्ति-भाव से भरा।
Mahābhārata
भारत-युद्ध का महाकाव्य — और उसके चारों ओर कथाओं का सागर।
Vālmīki Rāmāyaṇa
राम की कथा — संस्कृत का आदिकाव्य।
Śiva Purāṇa
शिव का केंद्रीय पुराण, सात संहिताओं में: विद्येश्वर, रुद्र (पाँच खंडों में), शतरुद्र, कोटिरुद्र, उमा, कैलास और वायवीय। अध्याय-संख्या संस्करणों में बदलती है; हमारे सभी संदर्भ गीताप्रेस के कल्याण शिवमहापुराणाङ्क के अनुसार हैं।
Liṅga Purāṇa
लिंग के अर्थ और पूजा पर केंद्रित शैव पुराण।
Skanda Purāṇa
सबसे बड़ा पुराण, तीर्थों के खंडों (काशी खंड, केदार खंड आदि) के लिए प्रसिद्ध।
Bhāgavata Purāṇa
एक वैष्णव पुराण — पर इसमें शिव की कई प्रिय कथाएँ हैं।
Kumārasambhava
कुमार (कार्तिकेय) के जन्म पर कालिदास का काव्य। काव्य है, शास्त्र नहीं।
Tēvāram
तीन महान नायनार कवियों — अप्पर, संबंदर और सुंदरर — के स्तोत्र, जो तमिलनाडु के मंदिरों में गाए जाते हैं।
Periya Purāṇam
तिरसठ नायनार संतों के जीवन-चरित।
Śiva Sūtras
कश्मीर शैव दर्शन के मूल सूत्र, जो वसुगुप्त पर प्रकट हुए माने जाते हैं।
Vacanas
बसवण्णा, अक्क महादेवी, अल्लम प्रभु और अन्य वीरशैव संतों के छोटे मुक्त-छंद वचन।
तिथियाँ विद्वानों के अनुमानित काल हैं। इनमें से कई ग्रंथ सदियों में विकसित हुए, और इनके काल पर मतभेद है।