नादभजन

नाद से उपजा संसार

शिव के डमरू की पहली थाप को नाद कहा गया — वह ध्वनि जिससे सृष्टि खुली। यहाँ के मंत्र इसी साइट के लिए रचे गए हैं।

ॐ नमः शिवाय
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मंत्र-ध्वनियाँ

इसे साथ चलने दें

इस मंत्र को दूर भेजिए, और आप साइट पर कहीं भी पढ़ें, यह धीमे-धीमे बजता रहेगा — जैसे घाटी के नीचे से किसी मंदिर की ध्वनि। कथा-वाचन शुरू होते ही यह अपने आप धीमा हो जाता है।

मूलजिन शब्दों पर यह रचा गया है

पंचाक्षर — पाँच अक्षर

ॐ नमः शिवाय

oṃ namaḥ śivāya

मंगलमय शिव को नमस्कार। न-मः-शि-वा-य: पाँच अक्षर, जिन्हें परंपरा पाँच महाभूत मानती है — सारी सृष्टि का अपने मूल को प्रणाम।

ये शब्द पहली बार यजुर्वेद के श्री रुद्रम् में मिलते हैं। श्लोक, उसका अर्थ और मूल स्रोत पढ़ें →

मौलिक संगीत — ॐ नमः शिवाय।