जिस लिंग की ब्रह्मा, विष्णु और देवता पूजा करते हैं; जो निर्मल प्रकाश से शोभित है; जो जन्म से उत्पन्न दुःख का नाश करता है — उस सदाशिव-लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।
लिंगाष्टकम् का पहला श्लोक, जो लिंग-पूजा के समय गाया जाता है। इसकी पहली पंक्ति अग्नि-स्तंभ की कथा की याद दिलाती है, जिसके आगे ब्रह्मा और विष्णु झुके थे।
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मूल पाठ
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं
निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।
जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥
brahma-murāri-surārcita-liṅgaṃ
nirmala-bhāsita-śobhita-liṅgam |
janmaja-duḥkha-vināśaka-liṅgaṃ
tat praṇamāmi sadāśiva-liṅgam ||
अनुवाद
जिस लिंग की ब्रह्मा, विष्णु और देवता पूजा करते हैं; जो निर्मल प्रकाश से शोभित है; जो जन्म से उत्पन्न दुःख का नाश करता है — उस सदाशिव-लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।
अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम
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