← सभी श्लोक
शिव मानस पूजा

जो भी अपराध हुआ, क्षमा करें

करचरणकृतम्
मूल मूल पाठ
करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वाश्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम् ।विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्वजय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥
kara-caraṇa-kṛtaṃ vāk-kāyajaṃ karmajaṃ vāśravaṇa-nayanajaṃ vā mānasaṃ vāparādham |vihitam avihitaṃ vā sarvam etat kṣamasvajaya jaya karuṇābdhe śrī-mahādeva śambho ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

हाथों या पैरों से, वाणी, शरीर या कर्म से, सुनने या देखने से, या मन से जो भी अपराध हुआ; विहित में या अविहित में — वह सब क्षमा कीजिए। हे करुणा-सागर, श्री महादेव, शम्भु! आपकी जय हो, जय हो।

भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं

शिव मानस पूजा का अंतिम श्लोक। इसे पूजा के अंत में कहा जाता है — उसमें हुई हर भूल की क्षमा माँगते हुए।

प्रमाण प्रमाण
परंपरा
से
शिव मानस पूजा
श्लोक 5
रचयिता (परंपरा अनुसार): आदि शंकराचार्य (परंपरा अनुसार)
स्रोत खोलें

मूल पाठ

करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा

श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम् ।

विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व

जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥

kara-caraṇa-kṛtaṃ vāk-kāyajaṃ karmajaṃ vā

śravaṇa-nayanajaṃ vā mānasaṃ vāparādham |

vihitam avihitaṃ vā sarvam etat kṣamasva

jaya jaya karuṇābdhe śrī-mahādeva śambho ||

अनुवाद

हाथों या पैरों से, वाणी, शरीर या कर्म से, सुनने या देखने से, या मन से जो भी अपराध हुआ; विहित में या अविहित में — वह सब क्षमा कीजिए। हे करुणा-सागर, श्री महादेव, शम्भु! आपकी जय हो, जय हो।

अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

यह पाठ संग्रह में मौजूद है; संपादकीय समीक्षा अभी बाकी है।

पूरी व्याख्या पढ़ें →
अर्पण

जो मन में है, अर्पित करें

विचार

आपके मन में क्या रह गया?

एक पंक्ति, एक स्मृति, एक प्रश्न — इसने आपके मन में जो जगाया, वह साझा कीजिए। भेजते ही यह यहाँ दिखेगा।

1 में से 0 स्रोत अध्याय या श्लोक तक निश्चित। यह पृष्ठ अभी किसी संपादक द्वारा समीक्षित नहीं है। हम कैसे जाँचते हैं →

स्तोत्रक्षमा-प्रार्थनानित्य पूजा
अगला: एक बिल्वपत्र, शिव को अर्पण →