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नादभजन

मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्

मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्
विस्तृत भजन · 0:00 / 2:09
मूलजिन शब्दों पर यह रचा गया है

महामृत्युंजय — मृत्यु पर विजय का महामंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥

oṃ tryambakaṃ yajāmahe sugandhiṃ puṣṭivardhanam |

urvārukam iva bandhanān mṛtyor mukṣīya mā'mṛtāt ||

हम त्रिनेत्रधारी की उपासना करते हैं, जो सुगंधित हैं और सारे जीवन को पुष्ट करते हैं। जैसे पका फल अपनी बेल से छूट जाता है, वैसे ही मैं मृत्यु से मुक्त होऊँ — अमरत्व से नहीं।

ऋग्वेद 7.59.12 — यजुर्वेद में भी। श्लोक, उसका अर्थ और मूल स्रोत पढ़ें →

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मौलिक संगीत — ॐ नमः शिवाय।