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उमामहेश्वर स्तोत्रम्

शिव-पार्वती को नमस्कार

उमामहेश्वरस्तोत्रम् — १
मूल मूल पाठ
नमः शिवाभ्यां नवयौवनाभ्यांपरस्पराश्लिष्टवपुर्धराभ्याम् ।नगेन्द्रकन्यावृषकेतनाभ्यांनमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥
namaḥ śivābhyāṃ nava-yauvanābhyāṃparasparāśliṣṭa-vapur-dharābhyām |nagendra-kanyā-vṛṣa-ketanābhyāṃnamo namaḥ śaṅkara-pārvatībhyām ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

नित्य युवा, एक-दूसरे से जुड़े स्वरूप वाले मंगलमय युगल को नमस्कार; पर्वतराज की पुत्री और वृषध्वज को — शंकर और पार्वती को बार-बार नमस्कार।

भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं

शिवाभ्याम् द्विवचन है: “दोनों शिवों को” — शिव और शिवा। यह स्तोत्र उन्हें सदा एक साथ नमन करता है, कभी अलग नहीं।

प्रमाण प्रमाण
परंपरा
से
उमामहेश्वर स्तोत्रम्
श्लोक 1
रचयिता (परंपरा अनुसार): आदि शंकराचार्य (परंपरा अनुसार)
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मूल पाठ

नमः शिवाभ्यां नवयौवनाभ्यां

परस्पराश्लिष्टवपुर्धराभ्याम् ।

नगेन्द्रकन्यावृषकेतनाभ्यां

नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥

namaḥ śivābhyāṃ nava-yauvanābhyāṃ

parasparāśliṣṭa-vapur-dharābhyām |

nagendra-kanyā-vṛṣa-ketanābhyāṃ

namo namaḥ śaṅkara-pārvatībhyām ||

अनुवाद

नित्य युवा, एक-दूसरे से जुड़े स्वरूप वाले मंगलमय युगल को नमस्कार; पर्वतराज की पुत्री और वृषध्वज को — शंकर और पार्वती को बार-बार नमस्कार।

अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

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