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शिव पुराण

जिनका जन्म सफल है

ते जन्मभाजः
मूल मूल पाठ
ते जन्मभाजः खलु जीवलोकेये वै सदा ध्यायन्ति विश्वनाथम् ।वाणी गुणान् स्तौति कथां शृणोतिश्रोत्रद्वयं ते भवमुत्तरन्ति ॥
te janma-bhājaḥ khalu jīva-lokeye vai sadā dhyāyanti viśvanātham |vāṇī guṇān stauti kathāṃ śṛṇotiśrotra-dvayaṃ te bhavam uttaranti ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

इस जीवलोक में उन्हीं का जन्म सफल है जो सदा विश्वनाथ का ध्यान करते हैं, जिनकी वाणी उनके गुण गाती है और जिनके दोनों कान उनकी कथा सुनते हैं — वे संसार-सागर से पार हो जाते हैं।

भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं

यह शिव पुराण के आरंभ में दिए माहात्म्य से है। मन, वाणी और श्रवण — तीनों का एक साथ नाम लिया गया है; कथा आरंभ होने से पहले यह श्लोक प्रायः पढ़ा जाता है।

प्रमाण प्रमाण
श्लोक
निश्चित
शिव पुराण
शिव पुराण माहात्म्य, अध्याय 7, श्लोक 49
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मूल पाठ

ते जन्मभाजः खलु जीवलोके

ये वै सदा ध्यायन्ति विश्वनाथम् ।

वाणी गुणान् स्तौति कथां शृणोति

श्रोत्रद्वयं ते भवमुत्तरन्ति ॥

te janma-bhājaḥ khalu jīva-loke

ye vai sadā dhyāyanti viśvanātham |

vāṇī guṇān stauti kathāṃ śṛṇoti

śrotra-dvayaṃ te bhavam uttaranti ||

अनुवाद

इस जीवलोक में उन्हीं का जन्म सफल है जो सदा विश्वनाथ का ध्यान करते हैं, जिनकी वाणी उनके गुण गाती है और जिनके दोनों कान उनकी कथा सुनते हैं — वे संसार-सागर से पार हो जाते हैं।

अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

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