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मंदिर परंपरा

कर्पूर-से गौर

कर्पूरगौरम्
मूल मूल पाठ
कर्पूरगौरं करुणावतारंसंसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।सदा वसन्तं हृदयारविन्देभवं भवानीसहितं नमामि ॥
karpūra-gauraṃ karuṇāvatāraṃsaṃsāra-sāraṃ bhujagendra-hāram |sadā vasantaṃ hṛdayāravindebhavaṃ bhavānī-sahitaṃ namāmi ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

जो कर्पूर के समान गौर हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं, नागराज जिनका हार है; जो सदा हृदय-कमल में वास करते हैं — भवानी सहित उन भव को मैं नमन करता हूँ।

भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं

संभवतः शिव का सबसे प्रसिद्ध श्लोक, जो घरों और मंदिरों में आरती के अंत में गाया जाता है।

इसे प्रायः यजुर्वेद या शिव पुराण का कहा जाता है, पर हमें यह दोनों में नहीं मिला; इसलिए हम इसे ईमानदारी से पूजा-परंपरा का श्लोक लिख रहे हैं।

प्रमाण प्रमाण
परंपरा
से
मंदिर परंपरा
आरती के अंत में गाया जाता है
शिव पुराण या यजुर्वेद में नहीं मिला।
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मूल पाठ

कर्पूरगौरं करुणावतारं

संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।

सदा वसन्तं हृदयारविन्दे

भवं भवानीसहितं नमामि ॥

karpūra-gauraṃ karuṇāvatāraṃ

saṃsāra-sāraṃ bhujagendra-hāram |

sadā vasantaṃ hṛdayāravinde

bhavaṃ bhavānī-sahitaṃ namāmi ||

अनुवाद

जो कर्पूर के समान गौर हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं, नागराज जिनका हार है; जो सदा हृदय-कमल में वास करते हैं — भवानी सहित उन भव को मैं नमन करता हूँ।

अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

यह पाठ संग्रह में मौजूद है; संपादकीय समीक्षा अभी बाकी है।

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