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शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्

पंचाक्षर स्तोत्र — व

शिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् — ४
मूल मूल पाठ
वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य-मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय ।चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनायतस्मै वकाराय नमः शिवाय ॥
vasiṣṭha-kumbhodbhava-gautamārya-munīndra-devārcita-śekharāya |candrārka-vaiśvānara-locanāyatasmai va-kārāya namaḥ śivāya ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

जिनके मस्तक की पूजा वसिष्ठ, अगस्त्य और गौतम जैसे श्रेष्ठ मुनि और देवता करते हैं; चंद्र, सूर्य और अग्नि जिनके तीन नेत्र हैं — उन “व”कार स्वरूप शिव को नमस्कार।

भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं

चौथा श्लोक — “व” का। कुम्भोद्भव, “घड़े से उत्पन्न”, अगस्त्य ऋषि हैं।

प्रमाण प्रमाण
परंपरा
से
शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्
श्लोक 4
रचयिता (परंपरा अनुसार): आदि शंकराचार्य (परंपरा अनुसार)
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मूल पाठ

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य-

मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय ।

चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय

तस्मै वकाराय नमः शिवाय ॥

vasiṣṭha-kumbhodbhava-gautamārya-

munīndra-devārcita-śekharāya |

candrārka-vaiśvānara-locanāya

tasmai va-kārāya namaḥ śivāya ||

अनुवाद

जिनके मस्तक की पूजा वसिष्ठ, अगस्त्य और गौतम जैसे श्रेष्ठ मुनि और देवता करते हैं; चंद्र, सूर्य और अग्नि जिनके तीन नेत्र हैं — उन “व”कार स्वरूप शिव को नमस्कार।

अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

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