जिन्होंने यक्ष का रूप धारण किया, जो जटाधारी हैं, हाथ में पिनाक धनुष लिए हैं, सनातन हैं; दिव्य देव, दिगंबर — उन “य”कार स्वरूप शिव को नमस्कार।
अंतिम श्लोक — “य” का। “यक्ष का रूप” यक्षेश्वर की कथा की याद दिलाता है, जिन्होंने देवताओं का गर्व तोड़ा।
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मूल पाठ
यक्षस्वरूपाय जटाधराय
पिनाकहस्ताय सनातनाय ।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय
तस्मै यकाराय नमः शिवाय ॥
yakṣa-svarūpāya jaṭā-dharāya
pināka-hastāya sanātanāya |
divyāya devāya digambarāya
tasmai ya-kārāya namaḥ śivāya ||
अनुवाद
जिन्होंने यक्ष का रूप धारण किया, जो जटाधारी हैं, हाथ में पिनाक धनुष लिए हैं, सनातन हैं; दिव्य देव, दिगंबर — उन “य”कार स्वरूप शिव को नमस्कार।
अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम
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