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शिव पुराण

उमा सहित शिव को नमस्कार

नमः शिवाय सोमाय
मूल मूल पाठ
नमः शिवाय सोमाय सगणाय ससूनवे ।प्रधानपुरुषेशाय सर्गस्थित्यन्तहेतवे ॥
namaḥ śivāya somāya sagaṇāya sasūnave |pradhāna-puruṣeśāya sarga-sthity-anta-hetave ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

उमा सहित, गणों सहित और पुत्रों सहित शिव को नमस्कार; जो प्रकृति और पुरुष के ईश्वर हैं, और सृष्टि, स्थिति तथा अंत के कारण हैं।

भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं

यहाँ सोम का अर्थ है स-उमा, “उमा के साथ”। यह श्लोक एक साथ पूरे कैलास-परिवार को प्रणाम करता है — शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और गण।

यह शिव पुराण की अंतिम संहिता, वायवीय संहिता, का पहला श्लोक है।

प्रमाण प्रमाण
श्लोक
निश्चित
शिव पुराण
वायवीय संहिता, पूर्व खंड, अध्याय 1, श्लोक 1
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मूल पाठ

नमः शिवाय सोमाय सगणाय ससूनवे ।

प्रधानपुरुषेशाय सर्गस्थित्यन्तहेतवे ॥

namaḥ śivāya somāya sagaṇāya sasūnave |

pradhāna-puruṣeśāya sarga-sthity-anta-hetave ||

अनुवाद

उमा सहित, गणों सहित और पुत्रों सहित शिव को नमस्कार; जो प्रकृति और पुरुष के ईश्वर हैं, और सृष्टि, स्थिति तथा अंत के कारण हैं।

अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

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