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शिव पुराण

महानंद को वंदन

वन्दे महानन्दम्
मूल मूल पाठ
वन्दे महानन्दमनन्तलीलंमहेश्वरं सर्वविभुं महान्तम् ।गौरीप्रियं कार्तिकविघ्नराज-समुद्भवं शङ्करमादिदेवम् ॥
vande mahānandam ananta-līlaṃmaheśvaraṃ sarva-vibhuṃ mahāntam |gaurī-priyaṃ kārtika-vighnarāja-samudbhavaṃ śaṅkaram ādi-devam ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

मैं उन्हें वंदन करता हूँ जो परम आनंद हैं, जिनकी लीलाएँ अनंत हैं; जो महेश्वर हैं, सर्वव्यापक और महान् हैं; गौरी के प्रिय, कार्तिकेय और विघ्नराज गणेश के जनक — आदिदेव शंकर।

भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं

यह शतरुद्र संहिता का मंगलाचरण है — वह संहिता जो शिव के अनेक अवतारों की कथा कहती है। “जिनकी लीलाएँ अनंत हैं” उसका उपयुक्त द्वार है।

प्रमाण प्रमाण
श्लोक
निश्चित
शिव पुराण
शतरुद्र संहिता, अध्याय 1, मंगलाचरण
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मूल पाठ

वन्दे महानन्दमनन्तलीलं

महेश्वरं सर्वविभुं महान्तम् ।

गौरीप्रियं कार्तिकविघ्नराज-

समुद्भवं शङ्करमादिदेवम् ॥

vande mahānandam ananta-līlaṃ

maheśvaraṃ sarva-vibhuṃ mahāntam |

gaurī-priyaṃ kārtika-vighnarāja-

samudbhavaṃ śaṅkaram ādi-devam ||

अनुवाद

मैं उन्हें वंदन करता हूँ जो परम आनंद हैं, जिनकी लीलाएँ अनंत हैं; जो महेश्वर हैं, सर्वव्यापक और महान् हैं; गौरी के प्रिय, कार्तिकेय और विघ्नराज गणेश के जनक — आदिदेव शंकर।

अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

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