ॐ — अ, उ, म, और उसके बाद का मौन: वह एक अक्षर जो संपूर्ण का प्रतीक है।
शिव पुराण प्रणव को शिव का अपना नाम बताता है: विद्येश्वर संहिता में अग्नि-स्तंभ के बाद शिव स्वयं इसे ब्रह्मा और विष्णु को देते हैं, और कहते हैं कि पंचाक्षर मंत्र नमः शिवाय इसी से प्रकट होता है।
लंबा और धीमा उच्चारण, एक मनके पर एक ॐ — यह सबसे सरल जप है।
निश्चित
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मूल पाठ
ॐ
oṃ
अनुवाद
ॐ — अ, उ, म, और उसके बाद का मौन: वह एक अक्षर जो संपूर्ण का प्रतीक है।
अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम
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पूरी व्याख्या पढ़ें →शिव का केंद्रीय पुराण, सात संहिताओं में: विद्येश्वर, रुद्र (पाँच खंडों में), शतरुद्र, कोटिरुद्र, उमा, कैलास और वायवीय। अध्याय-संख्या संस्करणों में बदलती है; हमारे सभी संदर्भ गीताप्रेस के कल्याण शिवमहापुराणाङ्क के अनुसार हैं।
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